2015          I               2014          I           2013
2013

9.  ‘तेलंगाना क्षेत्र में हिंदी साहित्य एवं संस्कृति’ शीर्षक से 27 सितम्बर, 2013 को पिंगली महिला शासकीय महाविद्यालय, वरंगल में आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी, हैदराबाद की वित्तीय सहायता से एक दिवसीय राज्य स्तर की संगोष्ठी संपन्न हुआ है. इस कार्यक्रम के उदघाटन समारोह में मुख्य अतिथि तथा आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी, हैदराबाद के निदेशक डॉ.के.दिवकरा चारी ने अपने भाषण में कहा कि- आंध्र प्रदेश में हिंदी के प्रचार-प्रचार को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के हिंदी रचनाकारों तथा संस्थाओं को प्रोत्साहन देते हुए तेलुगु भाषा, साहित्य और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाना हिंदी अकादमी का मुख्य उद्देश्य है. इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए अब तक राज्य के अनेक संस्थाओं, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों को प्रोत्सहन देते आयी है. इसी उद्देश्य के अनुरूप आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी ने वरंगल में स्थित पिंगली शासकीय महिला महाविद्यालय को हिंदी को प्रोत्साहन देने हेतु एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्टी के लिए वित्तीय सहायता दी है.
उन्होंने आगे कहा कि पीड़ित जनता की समस्याओं को अपनी समस्या समझकर निर्भीकता से रचनायें करने वाले पद्मविभूषण डॉ.कालोजी नारायण राव जी के जयंती के अवसर (सितम्बर, 2013) पर उनका कविता-संकलन ‘ना गोडवा’ से चयनित 100 कविताओं का हिंदी में अनुवाद करवाकर, प्रकाशित करवा रहे हैं, अक्तूबर में उसका लोकार्पण होगा. जनता में चेतना लाते हुए उन्नत जीवन के लिए मार्गदर्शन करनेवाला साहित्य ही असली साहित्य है और इस साहित्य तथा भाषा के प्रचार प्रसार हिंदी अकादमी अपने उद्देश्यों के अनुरूप कर रही है. इसके अंतर्गत राज्य स्तर की संगोष्ठी के लिए पिंगली महिला महाविद्यालय, वरंगल को वित्तीय सहायता करते हुए अकादमी को अत्यंत हर्ष हो रहा है.
कार्यक्रम के बीज व्याख्याता डॉ.टी.मोहन सिंह ने कहा कि निज़ाम के समय उर्दू का बोलबाला था. उस ज़माने में हिंदी में बात करना भी अपराध मना जाता था. लोग चुपके से हिंदी का प्रयोग करते थे. समय बदलता गया. तेलंगाना क्षेत्र में कई महान रचनाकारों का जन्म हुआ है. इन रचनाकारों की वजह से इस क्षेत्र में हिंदी ने बहुत प्रगति की है. अगर हिंदी को शासन की भाषा की जाए तो हिंदी का और विकास संभव है.
कार्यक्रम की अध्यक्षा तथा पिंगली कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ.के.प्रमीला अपनी अध्यक्षीय भाषाण में कहा कि आंध्र में हिंदी के प्रचार और प्रसार में आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी की भूमिका सराहनीय है. आगे उन्होंने तेलंगाना क्षेत्र में हिंदी के विकास के बारे में बात करते हुए, उसकी कठिनाइयों का भी उल्लेख किया है.

10.हिंदी दिवस के अवसर पर आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी, हैदराबाद ने दिनांक 20 नवंबर 2013 बुधवार को शाम 4 बजे ‘पुस्तक लोकार्पण एवं पुरस्कार वितरण समारोह’ का आयोजन किया है. इसमें पुस्तक लोकार्पणकर्ता, छात्र पुरस्कार वितरणकर्ता तथा कर्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में अकादमी के निदेशक डॉ.के.दिवाकरा चारी जी ने भाग लिया. वे अपने भाषण में कहा है कि हिंदी अकादमी अपने  लक्ष्यों के अनुरूप हिंदी विभाग, श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, तिरुपति के प्रोफेसर डॉ.आई.एन.चन्द्रशेखर रेड्डी द्वारा रचित ‘आंध्र में हिंदी लेखन और शिक्षण की स्थिति और गति’ पुस्तक अकादमी द्वारा प्रकाशित होना मुझे अत्यंत गौरव का अनुभव हो रहा है. इसके साथ-साथ अकादमी द्वारा आयोजित निबंध, वक्तृत्व, गायन प्रतियोगिताओं में विजय प्राप्त विद्यार्थियों को नकद पुरस्कार और प्रमाण–पत्र भी डॉ.चारी जी ने प्रदान किया है. इस कार्यक्रम के पुस्तक-परिचय कर्ता एवं पुस्तक लेखक डॉ. आई.एन.चंद्रशेखर रेड्डी ने कहा कि आंध्र में हिंदी लेखन और शिक्षण से संबंधित तीन प्रश्नावलियाँ तैयार करके आंध्र के तीन प्रदेशों में भेजा गया है. प्राप्त उत्तरों के आधार पर यह पुस्तक बनायी गयी है. पुस्तक समीक्षक के रूप में प्रोफेसर ऋषभ देव शर्मा जी ने भाग लिया है. उन्होंने अपने भाषण में कहा कि यह इस तरह की पहली पुस्तक है. हिंदी शिक्षण और लेखन संबंधी ऐसी पुस्तक अब तक आंध्र में नहीं है. .

 

1

2

3

4